गाभिन भैंसों की देखभाल कैसे करें ?

गाभिन भैंसों की देखभाल

गाभिन भैंसों की की देखभाल उचित तरीके से हो ताकि भैंस और बच्चे दोनों स्वस्थ रहें ,इसके लिए आपको गाभिन भैंसों की उचित देखभाल की जानकारी होना बहुत ही महत्वपूर्ण है। गर्भधारण से भैंस के ब्याने तक के समय को गर्भकाल कहते हैं। भैंस में गर्भकाल 310-315 दिन तक का होताहै। गर्भधारण की पहली पहचान […]

पशुओं के सन्तुलित आहार

पशुओं के सन्तुलित आहार

पशुओं सन्तुलित आहार वैज्ञानिक दृष्टि से दुधारू पशुओं के शरीर के भार के अनुसार उसकी आवश्यकताओं जिसे जीवन निर्वाह, विकास तथा उत्पादन आदि के लिए भोजन के विभिन्न तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट्स, वसा, खनिज,विटामिन तथा पानी की आवश्यकता होती है|पशु को 24 घण्टों में खिलाया जाने वाला आहार (दाना व चारा) जिसमें उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू भोज्य तत्व मौजूद हों, पशु आहार कहते है| जिस आहार में पशु के सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित अपुपात तथा मात्रा में उपलब्ध हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं|पशुओं में आहार की मात्रा उसकी उत्पादकता तथा प्रजनन की अवस्था पर निर्भर करती है| पशु को कुल आहार का 2/3 भाग मोटे चारे से तथा 1/3 भग दाने के मिश्रण द्वारा मिलाना चाहिए| मोटे चारे में दलहनी तथा गैर दलहनी चारे का मिश्रण दिया जा सकता है| दलहनी चारे की मात्रा आहार में बढने […]

लेयर मुर्गीपालन कैसे करें -वीडियो

पशु का आवास कैसे बनायें

पशु का आवास जितना अधिक स्वच्छ तथा आरामदायक रहता है,पशु का स्वस्थ उतना ही अच्छा रहता है जिससे वह अपनी क्षमता के अनुसार उतना ही अधिक दुग्ध उत्पादन करने में सक्षम हो सकता है।अत: दुधारू पशु के लिए साफ सुथरी तथा हवादार पशुशाला का निर्माण अतिआवश्यक है क्योंकि इसके आभाव से पशु दुर्बल हो जाता […]

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन कैसे करें ?

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय कुछ विशेष ध्यान रखने की आवश्‍यकता होती है। अगर हम जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन से अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा जिसकी चर्चा हम इस लेख में करेंगें । हालांकि बड़ी मुर्गियां गर्मी की अपेक्षा सर्दी आसानी से […]

हिंदी में पशुपालन गाइड-भाग २

हिंदी में पशुपालन गाइड

ग्रोवेल द्वारा प्रस्तुत  हिंदी में पशुपालन गाइड में पशुपालन से सम्बंधित विस्तृत जानकारी दी गई है ।हिंदी पशुपालन गाइड में निम्नांकित बिन्दुओं पर बिस्तृत जानकारी दी गई है । इस लेख को दो भागो में प्रकाशित किया गया है ,यह लेख हिंदी में पशुपालन गाइड का  भाग दो है । पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान: कृत्रिम विधि से नर पशु से […]

मुर्गी पालन कंपनी के मालिक बहादुर अली की कहानी.

मुर्गी पालन

मुर्गी पालन में कामयाबी की इस कहानी को पढ़िए और आप भी कुछ सीखिये इस कहानी से। हालात से समझौता नहीं करने वाले बहादुर अली पिता की अचानक मृत्यु के बाद साइकिल की दुकान में पंचर बनाने के लिए मजबूर हुए लेकिन मन में था कामयाबी का सपना… फिरशुरू किया अपना स्वरोजगार- मुर्गी पालन । […]

बकरी पालन कैसे करें ?

बकरी पालन

बकरी पालन प्रायः सभी जलवायु में कम लागत, साधारण आवास, सामान्य रख-रखाव तथा पालन-पोषण के साथ संभव है। इसके उत्पाद की बिक्री हेतु बाजार सर्वत्र उपलब्ध है। इन्हीं कारणों से पशुधन में बकरी का एक विशेष स्थान है। आज जब एक ओर पशुओं के चारे-दाने होने से पशुपालन आर्थिक दृष्टि से कम लाभकारी हो रहा है […]

पशु चिकित्सा के लिए आईसीयू.

पशु चिकित्सा

पशु चिकित्सा के लिए आईसीयू ,है न अच्चम्भा ! जी हाँ ,देश की एक ऐसी गौशाला जहां गायों का आपरेशन व पशुओं के लिए आईसीयू की व्यवस्था है। यहीं नहीं इनकी देखरेख के लिए 65 डाक्टर, 268 स्टाफ , 21 एम्बुलेंस व निजी कम्पाउंडर भी तैनात हैं। राजस्थान में पशुओं की सेवा के लिए नागौर […]

दुधारू पशुओं में प्रजनन

पशुओं में प्रजनन

पशुओं में प्रजनन  की सफलता के लिए पशुपालकों को मादा पशु में पाए जाने वाले मद चक्र की प्रक्रिया को जानना बहुत ही आवश्यक है। गाय या भैंस सामान्य तौर पर हर १८ से २१ दिन के बाद गर्मी में आती है जो की पशुओं के शरीर का वज़न लगभग २५० किलो होने पर शुरू होता […]

गर्मी में पशुपालन कैसे करें ?

गर्मी में पशुपालन

गर्मी में पशुपालन  करते समय पशुओं की विशेष देखभाल की जरुरत होती है क्योकि बेहद गर्म मौसम में , जब वातावरण का तापमान ‍ 42-48 °c तक पहुँच जाता है और गर्म लू के थपेड़े चलने लगतें हैं तो पशु दबाव की स्थिति में आ जाते हैं। इस दबाव की स्थिति का पशुओं की पाचन प्रणाली और दूध उत्पादन क्षमता पर उल्टा प्रभाव पड़ता है।गर्मी में पशुपालन  करते समय नवजात पशुओं की देखभाल में अपनायी गयी तनिक सी भी असावधानी उनकी भविष्य की शारीरिक वृद्धि , स्वास्थ्य , रोग प्रतिरोधी क्षमता और उत्पादन क्षमता पर स्थायी कुप्रभाव डाल सकती है । गर्मी में पशुपालन करते समय करते समय करते समय  ध्यान न देने पर पशु के सूखा चारा खाने की मात्रा में १०–३० प्रतिशत और दूध उत्पादन क्षमता में १० प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। साथ ही साथ अधिक गर्मी के कारण पैदा हुए आक्सीकरण तनाव की वजह से पशुओं की बीमारियों से लड़नें की अंदरूनी क्षमता पर बुरा असर पडता है और आगे आने वाले बरसात के मौसम में वे विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं ।पशुओं को भीषण गर्मी, लू एवं तापमान के दुष्प्रभावों से कैसे बचाएं पशुधन को भीषण गर्मी, लू एवं तापमान के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एहतियात बरतने की […]